Wednesday, August 26, 2026
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महिलाओं की सेहत: गलतियों को पहचानकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का समय

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आज की तेज़-तर्रार दुनिया में, महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ कर देती हैं। व्यस्त दिनचर्या, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ और सामाजिक दबावों के चलते, वे अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन सी गलतियाँ कर रही हैं और किस तरह बेहतर पोषण और ध्यान के माध्यम से वे अपने शरीर और मन को स्वस्थ रख सकती हैं।

  • महिलाएं अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकालतीं। काम और घर के बीच की भागदौड़ में, वे स्वस्थ आहार और व्यायाम को प्राथमिकता नहीं देतीं। यह एक बड़ी गलती है। अगर महिलाएं अपने दिनचर्या में थोड़ी सी समय निकालें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, तो वे अपनी सेहत को बेहतर बना सकती हैं।
  • कई महिलाएं जल्दी में जंक फूड या अस्वस्थ स्नैक्स का सेवन करती हैं, जो पोषण की कमी का कारण बनता है। उन्हें चाहिए कि वे फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का चयन करें। इसके अलावा, मल्टीविटामिन का सेवन भी फायदेमंद हो सकता है, जिससे शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। यह न केवल शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि त्वचा और मन की सेहत के लिए भी लाभकारी है।
  • व्यायाम का महत्व नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। महिलाओं को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम व्यायाम करना चाहिए, जैसे कि चलना, दौड़ना, योगा, या एरोबिक्स। ये न केवल वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं, बल्कि ऊर्जा स्तर को भी बढ़ाते हैं। व्यायाम से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है।
  • तनाव आजकल हर महिला की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है। लेकिन इसे ठीक से प्रबंधित करना जरूरी है। ध्यान और योग का अभ्यास करने से न केवल तनाव कम होता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। महिलाएं नियमित रूप से ध्यान करने का समय निकालें, जिससे वे शांति और संतुलन प्राप्त कर सकें।
  • अच्छी नींद को नज़रअंदाज़ करना भी एक सामान्य गलती है। हर रात 7-9 घंटे की नींद लेना ज़रूरी है, ताकि शरीर और मस्तिष्क दोनों को आराम मिले। नींद की कमी से न केवल शरीर थकता है, बल्कि यह त्वचा की समस्याओं का भी कारण बन सकता है।
  • महिलाएं अक्सर अपनी देखभाल को अंतिम प्राथमिकता समझती हैं। लेकिन खुद की सेहत का ख्याल रखना और अपने प्रति प्यार दिखाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आत्म-प्रेम और आत्म-देखभाल से वे न केवल अपने शरीर को बल्कि अपने मन को भी स्वस्थ रख सकती हैं।

इन गलतियों को पहचानकर, महिलाएं बेहतर पोषण, मल्टीविटामिन का सेवन, और नियमित व्यायाम के माध्यम से एक स्वस्थ जीवनशैली अपना सकती हैं। स्वस्थ रहना न केवल एक विकल्प है, बल्कि यह एक आवश्यकता भी है। इसलिए, खुद के लिए समय निकालें और एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ें!

Kiran Rao’s *Laapataa Ladies* Selected as India’s Official Submission for Oscars 2025

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Kiran Rao’s *Laapataa Ladies* has officially been selected as India’s entry for the Oscars 2025 in the Best International Feature Film category. The announcement was made by the Film Federation of India (FFI) on Monday, September 23. The FFI is responsible for choosing the country’s submission for the Academy Awards each year. Rao’s sophomore directorial effort, *Laapataa Ladies*, was released in March and follows the story of a young man whose bride gets accidentally swapped with another woman. The film stars Sparsh Shrivastava, Nitanshi Goel, Pratibha Ranta, Chhaya Kadam, and Ravi Kishan, and is based on Biplab Goswami’s award-winning screenplay *Two Brides*. The FFI jury, led by Assamese filmmaker Jahnu Barua, commended the film for its portrayal of Indian women as a balance of submission and strength. Set in a semi-idyllic world, the film uses humor and satire to explore the roles of women, portraying them as both homemakers and entrepreneurial rebels. The jury praised *Laapataa Ladies* for being entertaining and relatable to audiences worldwide while highlighting themes of change and empowerment. With this selection, Kiran Rao’s *Laapataa Ladies* now represents India on the global stage, aiming for recognition at the prestigious Academy Awards in 2025.

गुजरात की रिया सिंघा बनीं मिस यूनिवर्स इंडिया 2024, अब करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व वैश्विक मंच पर”

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19 साल की रिया सिंघा, जो गुजरात से हैं,मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 का ताज पहनाया गया है। अब वह भारत का प्रतिनिधित्व मिस यूनिवर्स 2024 प्रतियोगिता में करेंगी। इस प्रतिष्ठित खिताब की ग्रैंड फिनाले 22 सितंबर को जयपुर, राजस्थान में आयोजित किया गया था।अपनी जीत के बाद, रिया ने कहा, “मैं बहुत आभारी हूं। मैंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है और खुद को इस ताज के योग्य मानती हूं। पिछले विजेताओं से मुझे बहुत प्रेरणा मिली है।”

“Microplastics: Hidden Threats to Human Health and Ecosystems—A Call for Urgent Action”

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माइक्रोप्लास्टिक, जो 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं, आज हमारे पर्यावरण में एक गंभीर समस्या बन चुके हैं। ये कण हवा, पानी, और मिट्टी में सर्वव्यापी हो गए हैं, जो न केवल हमारे पर्यावरण को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि इंसानों और अन्य जीवों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन चुके हैं। जब ये छोटे कण हवा, पानी, या मिट्टी में प्रवेश करते हैं, तो वे विभिन्न मार्गों से हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। हवा के माध्यम से, ये कण सांस के जरिए हमारे फेफड़ों में घुस सकते हैं। पानी में घुलकर ये हमारे पीने के स्रोतों और भोजन का हिस्सा बन सकते हैं, जबकि मिट्टी के माध्यम से ये खाद्य श्रृंखला में शामिल हो जाते हैं। जिससे न केवल Ecosystem बल्कि इंसानों और अन्य जीवों के Health पर भी घातक प्रभाव पड़ रहा है। जब ये कण विभिन्न माध्यमों से शरीर में प्रवेश करते हैं, तो ये Cells को नुकसान पहुंचाते हैं, सूजन और Oxidative Stress उत्पन्न करते हैं, जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इन कणों की एक मुख्य समस्या यह है कि वे Heavy Metals और Chemical Toxins को अपनी सतह पर आकर्षित कर लेते हैं। जैसे-जैसे ये कण हवा, पानी, और मिट्टी के माध्यम से यात्रा करते हैं, ये Mercury, Cadmium, Lead, और Arsenic जैसी खतरनाक धातुओं को अवशोषित कर लेते हैं। जब ये कण मानव या पशु शरीर में पहुंचते हैं, तो ये सीधे Organs पर हमला कर सकते हैं, जिससे Cancer, Hormonal Imbalance, Neurological Disorders, और Fertility Issues जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाल के अध्ययनों ने यह भी दिखाया है कि माइक्रोप्लास्टिक अब हमारे महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच चुका है। Microplastics का एक बड़ा Source कृषि में उपयोग किए जाने वाले Plastic Products हैं। Irrigation के लिए Contaminated Water, Plastic Coverings, और Synthetic Fertilizers में मौजूद कण मिट्टी में जमा हो जाते हैं। इनसे Crops द्वारा Nutrients के अवशोषण में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे Food Chain प्रभावित होती है। इसके अलावा, Marine Water में ये कण Aquatic Organisms के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे Food Chain में Toxins फैलता है।हाल के Studies में यह खुलासा हुआ है कि Microplastics अब हमारे शरीर के Vital Organs तक भी पहुंच चुके हैं। 2020 में पहली बार Human Placenta में इन कणों की उपस्थिति पाई गई, जो Pregnant महिलाओं और Embryos दोनों के Health के लिए गंभीर चिंता का विषय है। 2023 में हुए एक Study ने दिखाया कि ये कण Human Heart और Intestines में भी पाए गए हैं, जिससे Cardiovascular Diseases और Digestive Disorders का खतरा बढ़ गया है।इस प्रदूषण के कारण Health-Related समस्याएं भी बढ़ रही हैं, जैसे Cancer, Hormonal Imbalance, और Respiratory Diseases। Health Care Systems पर इस समस्या का भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे Economic और Social Resources का बड़ा हिस्सा Health Care में खर्च हो रहा है।इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। हमें Plastic के उपयोग को कम करना होगा, Reuse और Recycling को बढ़ावा देना होगा, और Alternative Materials का उपयोग करना होगा। जन जागरूकता अभियान चलाकर और Educational Institutions में Plastic Pollution के विषय में शिक्षा देकर हम नई पीढ़ी को इस समस्या के प्रति जागरूक कर सकते Scientific Research को प्रोत्साहित करना और नए Materials पर अध्ययन करना भी आवश्यक है।यदि हम सभी मिलकर इन उपायों को अपनाएँ, तो हम इस गंभीर समस्या का समाधान कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ Environment सुनिश्चित कर सकते हैं।

“भारत की तकनीकी क्रांति: न्यूयॉर्क में PM मोदी और शीर्ष CEOs के साथ उभरती तकनीकों पर गहन मंथन”

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न्यूयॉर्क में आयोजित यह राउंडटेबल बैठक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इस बैठक में प्रमुख तकनीकी कंपनियों के सीईओ, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, और सेमीकंडक्टर तकनीकों में विशेषज्ञता रखने वाले नेताओं ने भाग लिया, प्रधानमंत्री के साथ भविष्य की तकनीकी प्रवृत्तियों और वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘AI फॉर ऑल’ नीति के तहत भारत के नैतिक और जिम्मेदार AI के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया, जिससे तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।  इस बैठक का आयोजन इसलिए किया गया ताकि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं और नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जा सके, और अमेरिकी कंपनियों को भारत के स्टार्टअप और तकनीकी इकोसिस्टम में निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारत तकनीकी नवाचार और विकास में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और आने वाले समय में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने सीईओ को भारत में बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और तकनीकी नवाचार के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया। बैठक के दौरान, यह भी चर्चा हुई कि कैसे उभरती हुई तकनीकें वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनर्परिभाषित कर रही हैं और मानव विकास को बढ़ावा दे रही हैं। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को अमेरिकी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में देखा गया, जहां वे भारत में निवेश कर सकते हैं और अपनी तकनीकी विशेषज्ञता से नए समाधान उत्पन्न कर सकते हैं। एमआईटी के प्रोफेसर अनंता चंद्रकासन, जो इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे,  भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया, और एमआईटी की वैश्विक भलाई के लिए तकनीक का उपयोग करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।इस राउंडटेबल का मुख्य परिणाम यह रहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और नवाचार संबंधी सहयोग को और मजबूत किया जाएगा, जिससे भारत में तकनीकी निवेश और नवाचार को नई दिशा मिलेगी। बैठक में तकनीकी उन्नति, बौद्धिक संपदा सुरक्षा, और जिम्मेदार AI के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी, और यह सुनिश्चित किया गया कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी और व्यावसायिक संबंध और अधिक गहरे होंगे।

Had a fruitful roundtable with tech CEOs in New York, discussing aspects relating to technology, innovation and more. Also highlighted the strides made by India in this field. I am glad to see immense optimism towards India.

IPS बनने की खुशी में ‘समोसा पार्टी’! 18 साल का लड़का बना फर्जी अफसर

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बिहार के जमुई में एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 18 साल का एक लड़का बिना UPSC पास किए खुद को IPS Officer बताकर धूम मचा रहा था। इस युवक, जिसका नाम मिथिलेश कुमार है,  IPS बनने की खुशी में बाकायदासमोसा पार्टीतक कर डाली। जब बाजार में समोसे खाने रुका, तो उसकी आईपीएस की वर्दी और पिस्टल कमर पर लटकाए हुलिया देखकर लोग हैरान रह गए। किसी को शक हुआ, और पुलिस को सूचना दी गई। जमुई के सिकंदरा थानाध्यक्ष मिंटू कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और मिथिलेश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने ऐसे खुलासे किए कि पुलिस भी चौंक गई।

मिथिलेश ने बताया कि उसे खैरा इलाके के एक व्यक्ति, मनोज सिंह, ने पुलिस में नौकरी दिलाने का ऑफर दिया था। मनोज ने उसे IPS Officer बनाने के लिए 2 लाख रुपये मांगे थे, जो मिथिलेश ने अपने मामा से कर्ज लेकर दिए। इसके बदले में मनोज ने उसके नाप का आईपीएस की वर्दी सिलवाई, एक बैच और पिस्टल थमा दिया, और उसेआज से तुम IPS होकहकर भेज दिया।मिथिलेश की इस अजीबोगरीब कहानी के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।

जमुई के एसडीपीओ सतीश सुमन ने बताया कि अगर मिथिलेश कुमार सही में 2 लाख रुपये देकर फर्जी आईपीएस बना है, तो पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस गिरोह को पकड़ने की होगी, जो इस तरह लोगों से ठगी कर रहा है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह घटना सिर्फ एक फर्जी अधिकारी की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में फैले एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करती है, जिसे उजागर करना पुलिस के लिए अब सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया है।

Legendary Indian Cricketer Rahul Dravid attends 14th Edition Of Didac India Exhibition 2024

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Legendary Indian Cricketer Rahul Dravid attends 14th Edition Of Didac India Exhibition 2024 Event in New Delhi

आखिर सीताराम येचुरी की किस बातों पर ठहाके मारकर हंस पड़े थे पीएम मोदी

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देश के जाने-माने राजनेता एवं सीपीआईएम (CPIM) के महासचिव सीताराम येचूरी (Sitaram Yechuri) का बीते 12 सितंबर को दिल्ली एम्स में निधन हो गया। वह लंबे समय से निमोनिया जैसी बीमारी से ग्रसित थे। सीताराम येचूरी हमेशा गरीब, मजलूमों की कान और आँख बनकर उनकी अवाज को सड़क से संसद तक उठाया करते थे।

देश-दुनिया के विषय पर गंभीर और गहरी समझ रखने वाले सीताराम येचूरी (Sitaram Yechuri) अपने निजी जीवन में बहुत ही मजाकिया किस्म के इंसान थे। ScoopWhoop के एक एपीसोड में उन्होंने अपनी पत्नी सीमा चिस्ती (Seema chishti) की तारीफ करते हुए कहा था कि ‘सच तो ये है कि ये मेरा भरण पोषण करती हैं, ये बातें काफी दिनों तक सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी थी।’

                                                                             photo credit oneindia

इसके अलावा उन्हें कई मौक़े पर ऑन कैमरा कैप्चर किया गया, जिसमें वह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और अपनों के साथ हंसी-ठिठोली करते नजर आए। हंसी-ठिठोली के उन्ही पलों में से उनका एक किस्सा काफी मशहूर है। दरअसल, 5 दिसंबर 2022 को पीएम मोदी (Narendra Modi) ने G20 समिट को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस दौरान एक तस्वीर इंटरनेट पर खूब वायरल हुई जिसमें सीताराम येचुरी और पीएम मोदी ठहाके लगा रहे थे।

खैर, कुछ ही दिन बीतने के बाद खुद येचूरी ने वायरल तस्‍वीर का भेद खोल दिया। कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रम ‘जश्‍न-ए-एकता’ में येचुरी से उस फोटो पर नवभारत टाइम्स के पत्रकार ने सवाल पूछा। जवाब में येचुरी ने बताया कि ‘हमने मीटिंग में जो बातें कहीं, उससे मोदी जी काफी नाराज थे। उसी को मेकअप करने के लिए वो आए और हमसे कहा कि मिठाई खिलाओ… हमने पूछा काहे… तो उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कह दिया कि जय श्रीराम नहीं बोलना है, जय सीताराम बोलना है, इसलिए आप मिठाई खिलाओ…।’

येचुरी ने आगे कहा, ‘मोदी जी, शायद आपको याद होगा… आप मौजूद थे सदन में… जब आप ही के साथी ने कहा था कि नाम सीताराम है तुम्‍हारा, लेकिन बातें ऐसी क्‍यों करते हो? वो नाराज थे कि हम सांप्रदायिकता के खिलाफ बातें कैसे करते हैं। तब हमने जवाब दिया कि मेरा नाम लेकर आप मुझे गाली ही दे दो, फिर भी पुण्‍य ही मिलेगा क्‍योंकि सीताराम बोलना पड़ेगा आपको…।’ येचुरी ने कहा कि इस बात पर मोदी जी हाथ पकड़कर हंसने लगे।

                                         photo credit nbt

यह हमेशा हँसने-मुस्कुराने वाला शख़्स अपने करोड़ों चाहने वालों की आँखों में आँसू की बुँदे देकर किसी लंबी यात्रा पर निकल गया। पर वह लौटेगा दिल्ली के रामलीला मैदान में जहां लोग मजलूम-वंचितों के हक और हिस्सेदारी के लिए जुलूस निकालेंगे। वह घुंघराले बालों वाला शख़्स उसी भीड़ मे ‘इंक़लाब’ का नारा लगाते हुए दिख जाएगा। वह उस हर एक कॉमरेड के दिलों में लौटेगा जो अपने गांव कस्बों में अन्याय के खिलाफ पिछड़ों की आवाज उठाएगा। वह एक बार फिर लौटेगा जेएनयू की सड़कों पर छात्रों के बीच डफली बजाते हुए।

वाकई,यह घुंघराले बालों वाला शख़्स बहुत याद आएगा।

गुड बाय कॉमरेड

Elvish Yadav, Harsh Beniwal, Thugesh & Suyyash Rai & Other attends ECL Press Meet

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Elvish Yadav, Harsh Beniwal, Thugesh & Suyyash Rai & Other attends (Entertainment Cricket League) ECL Press Conference in New Delhi

प्रशांत किशोर: चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बनने तक का सफर

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बिहार (Bihar) के एक ऐसे लड़के की कहानी जिसने देश में राजनीति करने और चुनाव लड़ने के तौर-तरीक़े को बदल कर रख दिया। आख़िर उस लड़के में ऐसी क्या क़ाबिलियत थी कि खुद नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उस लड़के को अमेरिका से बुला लिया।

दरअसल, बात 2010-11 की है वह लड़का अमेरिका जैसे देश यूएन (UN) में नौकरी कर रहा होता है। मैं यहाँ बार-बार लड़का शब्द का इस्तेमाल इसलिए कर रहा हूँ कि तब उस लड़के की उम्र महज़ 32 से 33 साल के क़रीब रही होगी।

वह लड़का यूएन में नौकरी के दौरान भारत के गुजरात के अलावा अन्य तीन राज्यों में कुपोषण के मौजूदा हालात पर आर्टिकल लिखता है। लेकिन यह बात गुजरात के उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के आँखों में नागवर गुजरती है। और कुछ ही दिन गुजरे होते है कि उस लड़के को गुजरात के CMO ऑफिस से फोन आता है।

फोन पर कोई और नहीं बल्की ख़ुद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी होते है, कुछ मिनट की बात-चीत के बाद फोन कटता है। और  इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन जाता है, कि “ख़ुद एक मुख्यमन्त्री ने UN में नौकरी कर रहे लड़के को गुजरात आने का न्योता दिया है।”

दरअसल, उस वक्त नरेंद्र मोदी ने फोन पर बातचीत के दौरान उस लड़के से कहा था, “कि आप यूएन की नौकरी छोड़कर यहां आइये और हमारे साथ मिलकर काम कीजिए, शिकायत क्यों कर रहे हैं।”

पलट कर उस लड़के का जवाब आता है, “ठीक है मैं नौकरी छोड़ दूँगा लेकिन बदले में आप मुझे हायरार्की का हिस्सा नहीं बनाएंगे। मैं आपके साथ सीधे तौर पर काम करूंगा।”

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे मैं किस लड़के की बात कर रहा हूँ, औपचारिकता है इसलिए मैं आपको बता देता हूँ। दरअसल, वह लड़का कोई और नहीं बल्कि प्रशांत किशोर (Prashant kishore) थे।
। जिसे आप और हम आज जन सुराज (Jan Suraj) के संयोजक के रूप में जानते है।

Photo credit pti

अब इसके आगे की कहानी जानने के लिए हमें कुछ चीजों को बिस्तार में जानना होगा। इसके लिए हम आपको 10 साल पीछे ले चलते है। साल 2014 का समय था। देश में कांग्रेस (congress) के ख़िलाफ़ पिच तैयार हो गई थी, और उनके लगभग सारे खिलाड़ी चोटिल हो गए थे।

उस वक्त बीजेपी फ़्रंट फुट से बैटिंग कर रही थी। और कांग्रेस के अनफिट बॉलर फूलटॉस फेंके जा रहे थे। फिर क्या था… बीजेपी के बैटर हर बॉल बाउंड्री के बाहर भेज रहे थे। उसके बाद जो हुआ वो सारा देश जानता है। लेकिन फिर भी याद दिलाने के लिए बता देता हूँ, तब उस वक्त की बीजेपी ने अपने दम पर आसानी से 282 रनों का आँकड़ा पार कर लिया और वहीं अनफिट कांग्रेस 44 रनों के छोटे स्कोर पर सिमट कर रह गई।

लेकिन क्या आपको पता है? उस वक्त बीजेपी (BJP) के ड्रेसिंग रूम में बैठकर एक लड़का ताली बजा रहा था। दरअसल, वह लड़का कोई और नहीं बल्कि, बीजेपी टीम का कोच था, और राजनीतिक भाषा में कहे तो चुनावी रणनीतिकार था। यहीं से प्रशांत किशोर को पहली बार रणनीतिकार के रूप में पॉपुलैरिटी मिली। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ा तो थमने का नाम ही नहीं लिया। प्रशांत किशोर ने देश के लगभग दर्जनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम किया और लगभग वह हर बार सफल होते गये या सफलता ख़ुद उनकी चौखट पर आकर उनके कदमों से लिपटती गई। फिर वह दौर भी आया जब प्रशांत किशोर को लगा कि उन्हें चुनावी रणनीतिकार वाले खेल से संन्यास ले लेना चाहिए।

आइए, अब थोड़े शब्दों में संन्यास लेने के पीछे की वजह जान लेते है, इसके लिए आपको फिर हमारे साथ आज से 9 साल पीछे चलना होगा। दरअसल, वर्ष 2015 का समय था। उस समय बिहार की राजनीति में उथल पुथल मची हुई थी, इसकी वजह थी जदयू का बीजेपी के साथ 17 सालों का एलायंस का टूटना और जदयू के आलाकमान नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का तेजस्वी यादव (Tejashawi Yadav) से हाथ मिलाना। और फिर पहली बार यहीं से शुरू हुई थी पलटी मार पॉलिटिक्स: ख़ैर अब कहानी को थोड़ा तेज़ी से आगे बढ़ाते है। दरअसल, वह प्रशांत किशोर ही थे जो आपस के घोर विरोधी जेडीयू और आरजेडी को एक मंच पर लेकर आए थे।

(PTI photo)

वहीं, वर्ष 2015 का समय आ गया था, इधर जेडीयू (JDU) और आरजेडी (RJD) एलायंस में पहली बार बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे। तो उधर पहली बार ही बीजेपी को बिहार में उम्मीद जगी थी, कि वह इस बार अपने दम पर बहुमत पा लेगीं और उसको अपना मुख्यमंत्री मिल जाएगा। जो कभी बिहार के इतिहास में हुआ नहीं था।

अब उम्मीद जगने के पीछे की वजह शॉर्ट में जान लेते है। दरअसल, रिकॉर्ड जीत के साथ नरेंद्र मोदी देश के नए-नवेले प्रधानमंत्री बने थे। उनकी पॉपुलैरिटी हिन्दी भाषी राज्यों में सातवें आसमान पर थी।

फिर क्या था, बिहार में चुनाव का पीच तैयार हो गया था। नई एलायंस जदयू-आरजेडी यानी, महागठबंधन का सामना बीजेपी कर रही थी। इस बार चुनाव पीएम का नहीं सीएम का था। लेकिन बीजेपी बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही थी।

इस बार बीजेपी के ख़िलाफ़ महागठबंधन का चौका-छक्का लग रहा था। और फिर से एक शख़्स ड्रेसिंग रूम में बैठकर ताली बजा रहा था। लेकिन इस बार ड्रेसिंग रूम बदल गया था, जिस ड्रेसिंग रूम में बैठकर शख़्स ताली बजा रहा था, वह बीजेपी का नहीं बल्कि महागठबंधन का था। शख़्स वहीं था,किरदार वहीं थे, बस इस बार कहानी बदल गई थी।

खेला ख़त्म हो गया था, नतीजे महागठबंधन के पक्ष में आ चुके थे और एक बार फिर बिहार का बागडोर नीतीश कुमार के हाथों में था। नीतीश कुमार के नज़र में इस जीत का हीरो प्रशांत किशोर बन गए थे जिन्होंने पूरे चुनाव में पर्दे के पीछे से काम किया था।

यह राजनीतिक घटना 2015 की थी अब हम आपको बीच में स्किप कर के सीधा 2018 में ले चलते है। तब तक नीतीश कुमार के priority लिस्ट में प्रशांत किशोर का नाम शुमार हो गया था। फिर इसी साल प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री होती है, एंट्री दिलाने वाला शख़्स कोई और नहीं बल्कि ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होते है।

Political Strategist Prashant Kishor took a dig at Nitish Kumar for his participation in G20 Gala Dinner.

प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री बड़ी थी, बड़ी इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि उन्हें सीधा जदयू का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक देश में राजनीति ने करवट ले ली। बीजेपी साल 2019 के दिसंबर महीने में सीएए (CAA) लेकर आई जिसके कारण देशभर में बवाल मच गया।

सीएए को लेकर देश की तमाम पार्टियाँ दो हिस्से में बंट गई थीं, इसमें एक पार्टी जेडीयू थी जो फिर से वापस बीजेपी में शामिल हो गई थी और अब बीजेपी के द्वारा लाए गए सीएए का समर्थन कर रही थी। बस यहीं बात प्रशांत किशोर की आँखों में चुभ गई और वे जदयू के ख़िलाफ़ हो गए।

दरअसल, प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी के रुख के खिलाफ जाते हुए ट्वीट किया था।

उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “बहुमत से संसद में नागरिकता संशोधन कानून पास हो गया। न्यायपालिका के अलावा अब 16 गैर बीजेपी मुख्यमंत्रियों पर भारत की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी है, क्योंकि ये ऐसे राज्य हैं, जहां इसे लागू करना है।” उन्होंने आगे लिखा, “तीन मुख्यमंत्रियों (पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल) ने सीएबी और एनआरसी को नकार दिया है और अब दूसरे राज्यों को अपना रुख स्पष्ट करने का समय आ गया है।”

फिर क्या था, इस ट्वीट के कुछ ही दिनों बाद प्रशांत किशोर से इस्तीफा ले लिया गया। अब वापस वहीं ले चलते हैं जहां आपको थोड़ी देर पहले छोड़ा था। यानी, जदयू से इस्तीफ़े के बाद प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीतिकार के रूप में सिर्फ़ ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) के लिए काम किया और उन्होंने इस फ़ील्ड को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee interacts with Prashant Kishor in Kolkata on March 8, 2022; (ANI Photo)

अब एक नई पारी की शुरुआत करने का वक़्त आ गया था, यह वक्त था कुछ बड़ा और अलग करने का। उन्होंने ठान लिया था कि ना ही “मैं अब किसी पार्टी का पार्ट बनकर काम करूँगा और ना ही किसी पार्टी को चुनाव जिताने के लिए काम करूँगा। अबकि बार काम करूँगा अपने लिए,अपनों के लिए और अपनी बिहार की मिट्टी के लिए।” 

Political strategist and Jan Suraj Abhiyan Chief Prashant Kishor Photo Credit: PTI

फिर वह समय आ ही गया जिसे प्रशांत किशोर को बखूबी इंतजार था। उन्होंने वर्ष 2022 में 2 अक्टूबर यानी, गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) के दिन बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले से 3500 किलोमीटर लम्बी पदयात्रा की शुरुआत की। इस पदयात्रा का मकसद बिहार के लोगों से कंनेक्ट होना और स्वयं की नई पार्टी बनाने का था। अब पदयात्रा लगभग ख़त्म होने वाला है और आने वाली 2 अक्टूबर 2024 को प्रशांत किशोर की नई पार्टी के नाम का एलान होने वाला है