Siliguri News | व्यापार जगत में हड़कंप, MSME तक पहुंचा मामला
सिलीगुड़ी से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर व्यापारिक मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय व्यापार जगत में हड़कंप मचा दिया है। स्क्रैप कारोबार से जुड़ी एक कंपनी पर आरोप है कि उसने लाखों रुपये का भुगतान रोक रखा है, लगातार झूठे बहाने बनाकर समय टाला जा रहा है और दूसरी कंपनी को मानसिक रूप से परेशान व दबाव में रखा जा रहा है। यह मामला अब सिर्फ एक लेन-देन का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि पूरे सिलीगुड़ी के व्यापारिक माहौल में चिंता और चर्चा का बड़ा कारण बनता जा रहा है।
Srishti Merchant Pvt Ltd ने लगाए गंभीर आरोप
जानकारी के मुताबिक, Srishti Merchant Pvt Ltd नाम की कंपनी लंबे समय से Jai Mata Engineering Pvt Ltd के साथ स्क्रैप के व्यापार में जुड़ी हुई थी। बताया जा रहा है कि Srishti Merchant Pvt Ltd ने सिलीगुड़ी से जयपुर तक स्क्रैप गुड्स की सप्लाई की थी, जो Jai Mata Engineering Pvt Ltd को भेजा गया था।
पीड़ित कंपनी का आरोप है कि Jai Mata Engineering Pvt Ltd ने लगातार स्क्रैप खरीदा, लेकिन अब तक भुगतान रोक कर रखा है।
जानकारी के अनुसार, Jai Mata Engineering Pvt Ltd की फैक्ट्री जयपुर में स्थित है, जबकि उनका मुख्य कार्यालय गाजियाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में बताया जा रहा है। कंपनी के मालिकों के नाम अक्षय बंसल और मनोज बंसल बताए जा रहे हैं।
₹6 लाख से ₹6.5 लाख तक का भुगतान बताया जा रहा बकाया
Srishti Merchant Pvt Ltd के अनुसार, इस समय Jai Mata Engineering Pvt Ltd पर करीब ₹6 लाख से ₹6.5 लाख (सवा छह लाख) तक की रकम बकाया है, जो लंबे समय से अटकी हुई है।
कंपनी का कहना है कि उन्होंने कई बार संपर्क किया, लेकिन हर बार सिर्फ झूठे आश्वासन और वादे ही मिले। कभी कहा गया कि भुगतान 30 दिन में कर दिया जाएगा, तो कभी 60 दिन में पैसा क्लियर करने की बात कही गई।
लेकिन बार-बार समय बीतने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
‘माल खराब था’ कहकर भुगतान रोकने का आरोप
इतना ही नहीं, भुगतान ना देने के लिए Jai Mata Engineering Pvt Ltd अब यह बहाना भी बना रही है कि “आपका माल खराब था”, जबकि Srishti Merchant Pvt Ltd का कहना है कि माल पूरी तरह सही था और पहले भी उसी माल के साथ कारोबार होता रहा है।
पीड़ित कंपनी का आरोप है कि यह सिर्फ एक बहाना है ताकि भुगतान रोका जा सके और समय निकाला जा सके।
Mediator दिनेश काबरा की गारंटी के बावजूद नहीं हुआ भुगतान
इस पूरे मामले में एक और बड़ा नाम सामने आया है। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, Mediator दिनेश काबरा ने स्वयं यह गारंटी ली थी कि बकाया राशि 60 दिनों के भीतर क्लियर करवा दी जाएगी।
Srishti Merchant Pvt Ltd का कहना है कि उन्होंने दिनेश काबरा की गारंटी पर भरोसा करके समय दिया, लेकिन उसके बाद भी कई बार इंटीमेशन देने के बावजूद आज तक भुगतान नहीं हुआ।
MSME विभाग में दर्ज कराया गया मामला
कंपनी का कहना है कि जब उन्हें लगातार टालने और परेशान करने का सिलसिला जारी रहा, तब मजबूर होकर उन्होंने इस मामले को MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) विभाग में भी आधिकारिक रूप से दर्ज कराया।
Srishti Merchant Pvt Ltd का दावा है कि MSME में एप्लीकेशन देने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है और भुगतान अभी भी अटका हुआ है।
ईमेल, कॉल रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ी सबूत मीडिया को सौंपे
Srishti Merchant Pvt Ltd scrap dealer की ओर से दावा किया गया है कि इस पूरे मामले से जुड़े ईमेल्स, कॉल रिकॉर्डिंग्स और अन्य दस्तावेज़ी सबूत उन्होंने मीडिया से साझा किया है।
इन एविडेंस में भुगतान को लेकर किए गए वादे, बातचीत और बार-बार टालने की पूरी जानकारी मौजूद है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और भविष्य में कोई और व्यापारी इस तरह की कथित धोखाधड़ी का शिकार न बने।
पीड़ित कंपनी का बयान
पीड़ित पक्ष का कहना है:
“हमने कई बार मौका दिया, कई बार बातचीत की, लेकिन हर बार सिर्फ झूठे वादे किए गए। 60 दिन की गारंटी देने के बाद भी पैसा नहीं आया। हमें परेशान किया जा रहा है, डराया जा रहा है और भुगतान ना देने के लिए गलत बहाने बनाए जा रहे हैं।”
पीड़ित कंपनी ने अन्य व्यापारियों से अपील करते हुए कहा है कि इस तरह के लोगों से सावधान रहने की जरूरत है, ताकि भविष्य में कोई और व्यापारी इस प्रकार की कथित धोखाधड़ी और झूठे वादों का शिकार न बने।
अन्य व्यापारियों का पैसा भी फंसा होने का दावा
इसके साथ ही, Srishti Merchant Pvt Ltd scrap dealer का यह भी आरोप है कि Jai Mata Engineering Pvt Ltd द्वारा सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि कई अन्य व्यापारियों का भी पैसा अटकाया गया है, जिससे व्यापारियों में भारी नाराजगी और ग़ुस्सा का माहौल बना हुआ है।
कंपनी का आरोप है कि ऐसे मामलों में छोटे व्यापारियों का आर्थिक नुकसान होता है और उनका मानसिक उत्पीड़न भी किया जाता है।
फिलहाल मामला चर्चा में, कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल यह मामला सिलीगुड़ी के व्यापारिक जगत में तेजी से चर्चा में है। अब देखना होगा कि MSME विभाग और संबंधित अधिकारी इस मामले पर कब तक कार्रवाई करते हैं और पीड़ित कंपनी को कब तक न्याय मिल पाता है।


