सुलेमान और जाहिद पर स्क्रैप की खरीद-बिक्री में कथित साठगांठ, कांटा वजन में गड़बड़ी, फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के इस्तेमाल के आरोप; नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी उठे सवाल।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा स्थित THDC पावर प्लांट से जुड़े स्क्रैप की खरीद-बिक्री को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि प्लांट से निकलने वाले स्क्रैप की बिक्री और उसे बाहर ले जाने की प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इन गतिविधियों के कारण THDC को लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का नुकसान हो सकता है। इस पूरे मामले में सुलेमान और जाहिद नाम के दो स्क्रैप कारोबारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों की कुछ स्थानीय कारोबारियों और संबंधित अधिकारियों के साथ कथित साठगांठ है, जिसका फायदा उठाकर स्क्रैप की खरीद, वजन और प्लांट से सामग्री बाहर निकालने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित कंपनियों के अधिकारियों, नीलामी प्रक्रिया और स्क्रैप की बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या स्क्रैप की बिक्री पारदर्शी नीलामी के जरिए हुई?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, खुर्जा स्थित पावर प्लांट के निर्माण के दौरान बचने वाला लोहा और अन्य स्क्रैप THDC की संपत्ति है। आरोप है कि इस सामग्री की बिक्री निर्धारित और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के तहत किए जाने के बजाय कथित तौर पर चुनिंदा खरीदारों को फायदा पहुंचाया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि स्क्रैप की खरीद के लिए सीमित मात्रा के ऑर्डर जारी किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से उससे कहीं अधिक सामग्री प्लांट से बाहर निकाले जाने की आशंका है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ ऑर्डर लगभग 110 से 200 टन के बताए गए, जबकि कथित तौर पर 900 से 1,300 टन तक सामग्री बाहर निकाले जाने का संदेह है।
अब सवाल यह है कि वास्तविक रूप से कितनी सामग्री की नीलामी हुई, कितनी सामग्री खरीदारों को आवंटित की गई और कितनी सामग्री प्लांट से बाहर भेजी गई? इन सभी तथ्यों की पुष्टि ऑर्डर, बिल, स्टॉक रजिस्टर, वजन पर्चियों और गेट पास के मिलान से हो सकती है।
नीलामी कंपनी की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस मामले में शिकायतकर्ता ने उस नीलामी कंपनी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसके माध्यम से स्क्रैप की बिक्री की गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नीलामी की जानकारी सभी संभावित खरीदारों और व्यापारियों तक समान रूप से नहीं पहुंचाई गई। उनका दावा है कि कुछ चुनिंदा स्क्रैप कारोबारियों को ही इसकी जानकारी दी गई, जबकि अन्य इच्छुक व्यापारियों को बोली लगाने का उचित अवसर नहीं मिला।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर रिश्वत देकर नीलामी अपने पक्ष में कराने की कोशिश की गई और एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता ने इस सिलसिले में लगभग पांच लाख रुपये के कथित भुगतान का आरोप भी लगाया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि नीलामी में अधिक कारोबारियों को समान अवसर मिलता, तो स्क्रैप की बिक्री अधिक कीमत पर हो सकती थी, जिससे THDC को ज्यादा राजस्व प्राप्त होने की संभावना थी।
अब जांच का अहम विषय यह है कि नीलामी का नोटिस कब और कहां जारी किया गया, कितने कारोबारियों ने बोली लगाई, कितनी बोलियां प्राप्त हुईं, अंतिम कीमत किस आधार पर तय हुई और नीलामी कंपनी के साथ भुगतान का पूरा रिकॉर्ड क्या है।
फर्जी इनवॉइस, गेट पास और ई-वे बिल के इस्तेमाल का गंभीर आरोप
इस मामले में एक और गंभीर आरोप कुछ स्क्रैप से लदे वाहनों के दस्तावेजों को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ गाड़ियों को प्लांट से बाहर निकालने के लिए इनवॉइस, गेट पास और ई-वे बिल में बदलाव किए जाने की आशंका है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ दस्तावेजों की पीडीएफ कॉपी में वजन, तारीख और समय जैसी जानकारियों को एडिट करके इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि कुछ वाहनों के लिए जारी किए गए दस्तावेजों और वास्तविक रूप से बाहर भेजी गई सामग्री के विवरण में अंतर हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि कुछ मामलों में मूल दस्तावेजों की तुलना में अधिक दस्तावेज तैयार किए जाने की आशंका है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल स्क्रैप की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजों की प्रामाणिकता, माल की वास्तविक मात्रा और वाहन निकासी की अनुमति की भी विस्तृत जांच करनी होगी।
इसलिए संबंधित अधिकारियों से मांग है कि सभी मूल इनवॉइस, ई-वे बिल, गेट पास, वाहन नंबर, जीएसटी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में उपलब्ध लॉग की जांच कराई जाए। साथ ही, दस्तावेजों में किसी भी बदलाव की स्थिति में यह पता लगाया जाए कि बदलाव किसने किया, कब किया और किसकी अनुमति से किया गया।
कांटा वजन में गड़बड़ी कर सामग्री बाहर निकालने का आरोप
स्क्रैप से लदे ट्रकों के वजन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्लांट के अंदर और बाहर अलग-अलग कांटों पर वजन में अंतर दिखाकर वास्तविक मात्रा से कम वजन दर्ज किए जाने की आशंका है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि किसी ट्रक में लगभग 40 टन सामग्री लदी हो, लेकिन बाहर के वजन रिकॉर्ड में उससे काफी कम वजन दर्ज किया जाए, तो वास्तविक सामग्री और बिलिंग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है।
हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए संबंधित वाहनों की अंदर और बाहर की वजन पर्चियों, कांटा मशीन के रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेजों और वाहन निकासी के समय का मिलान जरूरी है। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या किसी वाहन का वजन जानबूझकर कम दर्ज किया गया और यदि ऐसा हुआ, तो उससे किसे आर्थिक लाभ मिला।
स्टॉक ट्रांसफर के नाम पर स्क्रैप बाहर भेजने का आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ वाहनों में स्क्रैप को स्टॉक ट्रांसफर या दूसरी जगह भेजी जाने वाली सामग्री के रूप में दर्ज करके बाहर निकाले जाने की आशंका है। उनका दावा है कि प्लांट परिसर में पहले के ठेकेदारों की बची हुई सामग्री को लेकर भी सवाल हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह जांचना जरूरी है कि ऐसी सामग्री का स्वामित्व किसके पास था, उसे बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी और संबंधित रिकॉर्ड में उसका विवरण किस रूप में दर्ज किया गया। यदि स्क्रैप को किसी दूसरे प्रकार की सामग्री बताकर बाहर भेजा गया है, तो इनवॉइस, स्टॉक रजिस्टर, गेट पास और वास्तविक सामग्री का मिलान इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।
L&T-MHI Power और THDC से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने L&T-MHI Power और THDC से जुड़े कुछ अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित स्तरों पर कथित मिलीभगत के कारण स्क्रैप की बिक्री और वाहन निकासी की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई होंगी और संभव है कि वरिष्ठ अधिकारियों तक वास्तविक स्थिति की जानकारी न पहुंची हो। इसलिए संबंधित कंपनियों से यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि स्क्रैप की बिक्री की अनुमति किस स्तर पर दी गई, सामग्री की मात्रा का सत्यापन किसने किया, गेट पास किसने जारी किए और वाहनों के बाहर निकलने से पहले दस्तावेजों की जांच किस प्रक्रिया के तहत की गई। साथ ही, संबंधित कंपनियों और आरोपों में नामित व्यक्तियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
कई वर्षों से चल रहे कथित खेल की जांच जरूरी
शिकायतकर्ता का दावा है कि यह मामला लंबे समय से चल रहा है और समय रहते जांच नहीं होने पर सरकारी परियोजना से जुड़ी सामग्री के नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्क्रैप की नीलामी से संबंधित रिकॉर्ड, जारी किए गए ऑर्डर, भुगतान का विवरण, वजन पर्चियां, गेट पास, स्टॉक रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज क्या बताते हैं? क्या निर्धारित मात्रा से अधिक स्क्रैप बाहर निकाला गया? क्या नीलामी की जानकारी सभी संभावित खरीदारों को दी गई? क्या कुछ वाहनों के दस्तावेजों में बदलाव किया गया? क्या इनवॉइस और ई-वे बिल वास्तविक सामग्री तथा वजन से मेल खाते हैं? और क्या किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई?
इन सभी सवालों के जवाब दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकते हैं।
ONE100 NEWS की मांग:
ONE100 NEWS की मांग है कि THDC प्रबंधन और संबंधित जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। जांच के दायरे में स्क्रैप की नीलामी कराने वाली कंपनी की भूमिका, टेंडर की सूचना जारी करने की प्रक्रिया, सभी बोलीदाताओं को मिले अवसर, अंतिम बिक्री मूल्य, संबंधित बैंक खातों में हुए भुगतान, वाहनवार गेट पास, इनवॉइस, ई-वे बिल और कांटा वजन के रिकॉर्ड को शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, यदि दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़, फर्जीवाड़े, रिश्वतखोरी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


