Thursday, April 3, 2025
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क्या सच में अमेरिका सुपर पावर देश है या कुछ गड़बड़ है?

समझने वाली बात ये है कि अमेरिका चाहे तेल की लड़ाई हो, सरहदों की जंग हो, ट्रेड वॉर हो, हथियारों की होड़ हो या फिर किसी मुल्क का अंदरूनी मामला, वह बिन बुलाये मेहमान की तरह हर जगह टपक जाता है। क्या सच में अमेरिका सुपर पावर देश है, इसलिए ऐसा करता है ? या सुपर पावर की बातें सिर्फ ढकोसला है। क्या होती है सुपर पावर की क्राइटेरिया, आखिर हम किस आधार पर कह सकते है कि फलां देश सुपर पावर है? 

इन सब चीजों को जानने के लिए हमें कुछ फैक्ट्स पर ध्यान देना होगा।  

एक ऐसा देश जो सैन्य और आर्थिक रूप से बाकी देशों से मजबूत हो उसे आमतौर पर सुपर पावर कहा जाता है। पर इसमें कितनी सच्चाई है, आइए हम इसे बिस्तार से समझते है।  स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अप्रैल में जारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 में global defense Expense की बात करे तो 2.44 ट्रिलियन डॉलर रहा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 

रिसर्च के अनुसार अकेले अमेरिका की defense Expense 916 बिलियन डॉलर और जीडीपी 27 ट्रिलियन डॉलर था। इनके पास 5,550 परमाणु हथियार 4,657 टैंक, 3,556 तोपखाना और 5,209 विमान हैं। अमेरिका 11 विमानवाहक पोतों को ऑपरेट करता है। उसके पास 64 पनडुब्बियां भी हैं। अमेरिका 218 सैन्य उपग्रहों को भी ऑपरेट करता है। इसके अलावा अमेरिका के पास दुनिया में सबसे अधिक विदेशी सैन्य अड्डे भी हैं।

सुपर पावर देश की एक खासियत होती है, वह दुनिया भर के देशों में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए राजनितिक हस्तछेप करता है। इतिहास के पन्नों को पलटे तो 19वीं सदी में यूरोप, 20वीं सदी में सोवियत रूस और अब अमेरिका ऐसा करता रहता है।  इसके अलावा अमेरिका यूनाइटेड नेशन पर अपना दाबाव बनाता रहता है।  और खासकर विश्व के कई महत्वपूर्ण संगठन G-5, G-7, G-20 इत्यादि संगठनों में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाता  है।

 चीन और रुस सुपर पावर को कैसे दे रहे हैं टक्कर?

रूस और चीन को भी अमेरिका के कॉम्पटीटर या विकल्प के रूप में देखा जाता है, लेकिन रिसर्च के अनुसार 2023 में चीन की जीडीपी 17.7 ट्रिलियन डॉलर और defense Expense 296.4 बिलियन डॉलर था।  इनके पास 350 परमाणु हथियार, 5,000 टैंक और 8,464 तोपखाना हैं। इसके अलावा 2,084 विमान, 3 विमानवाहक पोत और 61 पनडुब्बियां हैं। जो कि अमेरिका के मुकाबले काफी कम है।  

वहीँ रूस की बात करें तो 6,255 परमाणु हथियार, 14,777 टैंक, 17,638 तोपखाना,  3,652 विमान और 65 पनडुब्बियां,हैं। जो कि अमेरिका के डिफेंस सिस्टम  के मुकाबले मजबूत है।  फिर भी रूस एक चीज में मात खा जाता है वह है उसकी जीडीपी जो की 1.86 ट्रिलियन डॉलर है। 

गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कई सारी कंपनियां भी अमेरिका की है जिसका इस्तेमाल वह अपने फायदे के लिए कर सकता है। आपको याद होगा कि माइक्रोसॉफ्ट या फेसबुक थोड़े देर के लिए भी डाउन हो जाता है तो बाकी देशों में इसका कितना बूरा प्रभाव पड़ता है।  वह इन कंपनियों के माध्यम से कई सारे देशों का डाटा आसानी से हैक कर सकता है।   

इसके आलावा अमेरिका 2022 की फोर्ब्स लिस्ट में 2000 कंपनियों में से 590 अमेरिकी कंपनियां थीं। फोर्ब्स की इस लिस्ट की टॉप-20 कंपनियों में 11 अमेरिकी थीं, जिनमें पहले पायदान पर अमेरिका की बर्कशायर हैथवे कंपनी रही। कंपनियों के अलावा दुनिया के सबसे ज्यादा अरबपति भी अमेरिकी ही हैं। फोर्ब्स की लिस्ट में 2022 में 735 अरबपति अमेरिकी थे।  इनके पास 4.7 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ थी। इस समय भी दुनिया के 10 सबसे रईस लोगों में सात अमेरिकी हैं। टेस्ला और स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क दुनिया के दूसरे सबसे रईस हैं, जिनके पास 188 अरब डॉलर से ज्यादा की नेटवर्थ है। 

यानी सुपर पावर बनने के कई सारे क्राइटेरिया को अमेरिका FULL FILL करता है।  इसके आधार पर कह सकते है कि अमेरिका एक सुपर पावर देश है।

Sachin Sarthak
Sachin Sarthakhttps://one100news.com
सचिन सार्थक One100News में कंसल्टेंट हैं, बिहार के छोटे से शहर से निकलकर माखन लाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के निजी कैम्पस दिल्ली से ग्रेजुएट किया। पिछले 3 सालों से बतौर पत्रकार काम कर रहा हूं। लिखने और घूमने का शौक है।
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